सारनी। भारतीय जनता पार्टी की मण्ड़ल पदाधिकारी ​किरण राजकुमार नागले ने कहा कि ​”यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:” – भारतीय संस्कृति में महिलाओं को सदैव शक्ति का प्रतीक माना गया है। लेकिन आधुनिक राजनीति में उनकी भागीदारी आबादी के अनुपात में काफी कम रही है। इसी अंतर को पाटने के लिए भारत सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (106वां संविधान संशोधन) पारित किया है। इसके तहत लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं के राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण का एक नया अध्याय है।
​आरक्षण की आवश्यकता और महत्व के संदर्भ में ​किरण राजकुमार नागले ने कहा कि ​भारत की लगभग आधी आबादी महिलाओं की है, लेकिन नीति-निर्धारण और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी उपस्थिति अब तक सीमित रही है। 33% आरक्षण मिलने से निम्नलिखित सकारात्मक बदलाव आएंगे: ​समान प्रतिनिधित्व: संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ने से उन मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जाएगा जो सीधे तौर पर महिलाओं और बच्चों के जीवन को प्रभावित करते हैं।
​नेतृत्व क्षमता का विकास: के लिए ​किरण राजकुमार नागले ने कहा कि पंचायतों में पहले से ही मिल रहे आरक्षण ने यह साबित किया है कि महिलाएं जमीन स्तर पर बेहतरीन शासन और प्रबंधन कर सकती हैं। अब यही क्षमता राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देगी।
​सामाजिक रूढ़ियों का अंत: ​किरण  नागले ने कहा कि  जब महिलाएं कानून बनाने वाली संस्थाओं में बैठेंगी, तो समाज में उनके प्रति दृष्टिकोण बदलेगा और वे ‘अबला’ से ‘सबल’ की ओर अग्रसर होंगी।
​भविष्य की संभावनाएं और प्रभाव
​भविष्य में इस आरक्षण का प्रभाव भारत की विकास दर और सामाजिक ढांचे पर गहरा पड़ेगा ​नीतिगत बदलाव: शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा जैसे विषयों पर महिला संवेदनशीलता के साथ कानून बनेंगे।​आर्थिक सशक्तिकरण: राजनीति में बढ़ती भागीदारी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जैसा कि निबंध की तस्वीर में ‘उज्ज्वला’ और ‘मातृत्व वंदना’ जैसी योजनाओं का जिक्र है। ​विकसित भारत का सपना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प को पूरा करने के लिए महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य है। जब देश की आधी आबादी नीति-निर्माण में शामिल होगी, तभी भारत 2047 तक ‘विकसित राष्ट्र’ बनने के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा।
​चुनौतियां और समाधान
​हालांकि यह कानून पारित हो चुका है, लेकिन इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए परिसीमन (Delimitation) और जनगणना जैसे चरणों का पूरा होना जरूरी है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना होगा कि महिला प्रतिनिधि केवल प्रतीकात्मक (Rubber Stamp) न हों, बल्कि वे स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकें। इसके लिए उन्हें उचित राजनीतिक प्रशिक्षण और समर्थन देना समाज और राजनीतिक दलों का दायित्व है। ​निष्कर्ष ​नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का एक स्वर्णिम क्षण है। यह कानून महिलाओं को दया का पात्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में एक बराबर का भागीदार बनाता है। यह अधिनियम “उज्ज्वल भविष्य की नींव” है। जब नारी सशक्त होगी, तभी भारत वास्तव में समृद्ध और आत्मनिर्भर बनेगा।

By Vishal

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