अयोध्या. आज वह शुभ घड़ी है जब भक्तों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या के राम मंदिर में रामलाल की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की गई. प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान 16 जनवरी 2024 से शुरू किया गया था, जिसके बाद आज यानी 22 जनवरी 2024 को अभिजीत मुहूर्त में भगवान की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की गई. प्राण प्रतिष्ठा के बाद एक साधारण सी शिला भगवान के रूप में पूजी जाने लगती है. आईए जानते हैं इस विषय में विस्तार से भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से.

अभिजीत मुहूर्त में हुई प्राण प्रतिष्ठा
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अभिजीत मुहूर्त बेहद शुभ मुहूर्त माना जाता है, इस दौरान किए गए काम सफल होते हैं.

कैसे हुई प्राण प्रतिष्ठा
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में सबसे पहले भगवान राम को निद्रा से जगाया गया. जिसके बाद विशेष मंत्रों के उच्चारण से प्रभु राम को स्नान कराया गया. इसके बाद पूरे विधि-विधान से भगवान राम का श्रृंगार किया गया.

प्राण प्रतिष्ठा है जरूरी
सनातन धर्म में प्राण प्रतिष्ठा को विशेष महत्व दिया गया है. किसी भी मंदिर में देवी देवता की प्रतिमा स्थापित करने के बाद उसमें प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया जाता है. जो बहुत जरूरी माना जाता है. प्राण प्रतिष्ठा करने के बाद ही एक साधारण सी शिला या प्रतिमा जीवंत हो उठती है और भगवान का रूप धारण कर लेती है.

कैसे होती है प्राण प्रतिष्ठा
किसी भी प्रतिमा के प्राण प्रतिष्ठा के दौरान कई चरणों से गुजरना होता है. जो अधिवास की प्रक्रिया कहलाती है. अधिवास की प्रक्रिया में प्रतिमा को कई चीजों में डुबोया जाता है. इसमें सबसे पहले मूर्ति को जल में रखने का विधान है, उसके बाद अनाज में, फिर फलों में, उसके बाद औषधि में, केसर में और फिर घी में रखा जाता है.

इन सबके बाद प्रतिमा का विधि विधान से स्नान कराया जाता है, और अभिषेक भी कराया जाता है. मंत्रों के उच्चारण के बाद भगवान को जगाया जाता है और प्राण प्रतिष्ठा की पूजा आरंभ की जाती है. प्रतिमा का मुख इस दौरान पूर्व दिशा की तरफ रखा जाता है और सभी देवी देवता से आह्वान किया जाता है कि वह इस शुभ घड़ी में शामिल हों. पूजा को आगे बढ़ते हुए नए वस्त्र पहनाए जाते हैं, फिर भगवान का श्रृंगार किया जाता है और जिस प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा किया गया है उन्हें आईना दिखाया जाता है. प्राण प्रतिष्ठा के बाद भगवान की आंखों में इतना अधिक तेज होता है कि वह सिर्फ भगवान ही सहन कर पाते हैं, इसलिए आईना दिखाया जाता है. इसके बाद पूजा कर प्रसाद बांटा जाता है.

By Vishal

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