बैतूल। वो खाने को भी नहीं देते थे, खर्च के पैसे देना तो दूर। वहां खाने के लाले पड़ गए थे। किसी तरह गांव से रुपए बुलवाकर खर्चे चलाए। तब कहीं जाकर पेट भर सके। ठेकेदार बात बात पर पिटाई कर देता था। हमे बंद कर रखा जाता था। काम के समय खूब निगरानी की जाती थी, मोबाइल छुड़ा कर रख लिए गए थे, ताकि किसी को शिकायत नहीं कर सके। 6 महीने से हम बंधक थे। बीते डेढ़ महीने तो हमसे फ्री में काम करवाया गया। न तो मजदूरी दी गई और न ही खाने पीने का खर्च।
ये दास्तान महाराष्ट्र में बंधुवा बने मजदूरों ने वहां से मुक्त होने के बाद सुनाई है। गैर सरकारी संगठन जन साहस के प्रयास के बाद मजदूरों को छुड़वाकर आज सोमवार बैतूल लाया गया। जिनमें आठ वयस्क और तीन बच्चे शामिल है। इनमें चार महिलाएं और चार पुरुष है। भास्कर ने बीते दिनों महाराष्ट्र में फंसे इन मजदूरों का मुद्दा उठाया था। जिसके बाद बैतूल पुलिस और प्रशासन ने श्रम, पुलिस और संगठन के कार्यकर्ताओं की टीम बनाकर महाराष्ट्र भेजी थी। जहां से स्थानीय प्रशासन की मदद के बाद मजदूरों का रेस्क्यू किया गया।
मुआवजे की मांग
संगठन के कार्यकर्ता और समन्वयक पल्लवी ठाकरकर आज मजदूरों को लेकर कलेक्ट्रेट और एसपी दफ्तर पहुंचे। जहां उन्होंने मजदूरों को मुआवजा दिलवाए जाने की गुहार लगाई। मजदूरों ने ठेकेदार पर कार्रवाई और उनके मजदूरी की रकम भी दिलवाए जाने की मांग की है। समन्वयक पल्लवी ने बताया की मजदूरों के संबंध में महाराष्ट्र में एफआईआर दर्ज न किए जाने से श्रम विभाग का प्रकरण नहीं बन पा रहा है।ंवे चाहते है की ठेकेदार पर कार्रवाई हो और मजदूरों का रुका पैसा वापस मिल जाए।।
यह था मामला
पिछले छह माह से बंधुआ मजदूरी में फंसे आठ मजदूरों और उनके तीन बच्चो का रेस्क्यू न होने से बैतूल में उनके परिजन परेशान थे। मामला भीमपुर के आम ढाना का है। जहां अक्टूबर से आठ मजदूरों को महाराष्ट्र के कोल्हापुर ले जाया गया था, लेकिन अब ठेकेदार काम खत्म होने के बाद भी उन्हें वापस नहीं भेज रहा था।

मजदूरों के परिजन केशरसिंह ने बताया की पिछले 8 अक्टूबर को महाराष्ट्र के शेलोली कोल्हापुर के दो एजेंट गन्ना कटाई के लिए गांव के आठ मजदूरों को शेलोली तहसील भूदर गड़ जिला कोल्हापुर महाराष्ट्र ले गए थे। इसलिए उन्हें एडवांस राशि भी दी गई थी। सभी मजदूरों को 950 टन गन्ना कटाई करने का बोला गया था। जिसमें कहा गया था की उन्हें 375 रूपए प्रति टन की दर पर भुगतान दिया जाएगा और कटाई के तीन माह बाद उन्हें वापस उनके घर भेज दिया जाएगा। लेकिन इन मजदूरों को वहां रोक लिया गया था। जबकि सभी मजदूरों द्वारा 1700 टन गन्ना कटाई का काम पूरा कर दिया गया था।
दूसरे ठेकेदार के हवाले किया
बताया जा रहा है की मजदूरों को पहले वाले ठेकेदार ने दूसरे ठेकेदार कुलदीप के हवाले कर दिया, जो सभी मजदूरों को घर आने नहीx दे रहा था। इनमे तीन बच्चे भी शामिल थे। मजदूरों में ममताबाई पति साहेबराम मावस्कर सायबू पिता छोटेलाल मावस्कर, विनोद पिता केशरसिंह कास्देकर, रिंकी पति नंदू पांसे, देवेन्द्र पिता मोतीलाल कास्दे, नंदू पिता गेंदालाल पांसे,अनिता पति शांतिलाल कास्दे, किरण पिता केशरसिंह कास्देकर जबकि सारिका पिता साहेबराव मावस्कर (4),अजय पिता साहेबराव मावस्कर (7) साधना पिता साहेबराव मावस्कर (3) शामिल थे।
एसपी से लेकर श्रम तक शिकायत पर राहत नहीं
इस मामले में परिजन एसपी कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट और श्रम विभाग में भी तीन तीन बार शिकायत कर चुके थे।लेकिन किसी भी विभाग ने इस मामले में संज्ञान नही लिया। इस मामले में एनजीओ जनसाहस ने गांव जाकर मामले की पड़ताल की> यह मामला जनसुनवाई में कलेक्टर के सामने भी पहुंचा था। जिसके बाद कलेक्टर ने जांच और रेस्क्यू में तेजी बरतने के निर्देश दिए थे।तब कहीं यह रेस्क्यू हो सका।
