सारनी। न्यूनतम सरकार, अधिकतम राजकाज” का दावा करने वाली केन्द्रीय सरकार विश्व के बड़े बड़े बैंको, वित्त संस्थानों से कर्ज लेकर और किसानो ,श्रमिको के अधिकारों का हनन कर कैसे भारत को आत्मनिर्भर बना सकती है। प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्वतंत्रता सेनानी कृष्णा मोदी ने केंद्र सरकार के कार्य पर प्रश्न उठाया है।
क्या वास्तव में भारत को आज “शाइनिंग इंडिया” कहना वाजिब है क्योंकि सरकारी आंकड़ों के हिसाब से देश की 31 करोड़ जनता गरीबी की भयानक त्रासदी से गुजर रही है । संयुक्त राष्ट्र के श्रम निकाय के अनुसार कोरोनावायरस महामारी के कारण भारत में अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले लगभग 40 करोड़ लोग गरीबी में फंस कर उनका जीवन नरकीय हो गया है।
वही देश के किसानों को एक बार फिर कर्ज में दबाकर और मजदूरोें के जीवन रक्षक अधिकार ‘श्रम एक्ट’ को निष्प्रभावी कर सरकार शोषण करने के लिए पूॅजीवादियों के सामने किसानों और मजदूरों को परोस रही हैं। डॉ मोदी ने बताया 2021 तक भारत सबसे अधिक कर्ज वाली उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगी । दुनिया के सबसे बेरोजगार,कर्जदार देश की आर्थिक हालात को सुधारने के नाम पर मोदी सरकार ने किसान और मजदूरों को कर्जदार बनाने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा पहली ही कर चुकी हैं वही राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के अनुसार भारत में 52.5 प्रतिशत किसान कर्जे में दबे हुए हैं।
अर्थव्यवस्था को बजबूत करने के बहाने विनिवेश और निजीकरण पर जोर देते हुए मोदी सरकार ने रणनीतिक क्षेत्र से जुड़ी सरकारी कंपनियों की संख्या तीन साल में 300 से घटाकर 23 करने की योजना बनाई है। खुद प्रधानमंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र को साथ लाए बिना अर्थव्यवस्था का कल्याण संभव नहीं है। जिससे मेहनतकश श्रमिको और किसानो को आर्थिक गुलामी की जंजीरों में जकड़ जाएंगे। यह चिंता का विषय है कि देश की अर्थव्यवस्था में हुई वृद्धि का फायदा मात्र कुछ लोगों के हाथों के सिमटा जा रहा है। अरबपतियों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी फलती-फूलती अर्थव्यवस्था की नहीं बल्कि एक विफल अर्थव्यवस्था की निशानी है। जो मेहनत कर रहे हैं, कारखानों में काम कर रहे हैं, वें अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी तक जुटा पाने के लिए अत्यंत संघर्ष कर रहे हैं। यह बढ़ती खाई, लोकतंत्र को खोखला बना रही है और भ्रष्टाचार व पक्षपात को बढ़ावा देगी। सभी को ज्ञात है की भारत के निर्माण ,विकास में किसान और श्रमिक बहुमूल्य भूमिका निभाते आ रहा है।