दिल्ली। पीएम मोदी शुक्रवार को दिल्ली के भारत मंडपम में ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ के कार्यक्रम में पहुंचे। यहां उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से बात की।
स्वामीजी के होलोग्राम ने कहा कि आपसे मेरी मुलाकात पहली बार फरवरी 1993 में हुई थी। आप मुझे शिकागो में विश्व धर्म संसद के शताब्दी कार्यक्रम में आमंत्रित करने आए थे। मोदी ने जवाब दिया कि मैं खुशनसीब हूं कि फिर मुझे आपके दर्शन का सौभाग्य मिला।
होलोग्राम एक ऐसी 3D तकनीक है, जिसमें किसी व्यक्ति या वस्तु की तस्वीर असली जैसी दिखाई देती है और उसे अलग-अलग एंगल से देखने का एहसास होता है।
चिन्मय मिशन का तीन दिन का कार्यक्रम 23 से 25 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें देश-विदेश से 9 हजार से ज्यादा लोग शामिल हो रहे हैं। चिन्मय मिशन के 75 साल पूरे होने पर सालभर से देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम हुए थे। इस मिशन की शुरुआत 1951 में स्वामी चिन्मयानंद ने की थी, ताकि गीता और वेदों का ज्ञान आम लोगों तक आसानी से पहुंच सके।
पीएम ने कहा- अब देश ऋषियों-राष्ट्रभक्तों की राह पर
आज उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो रहा है। अयोध्या राम मंदिर हो, उज्जैन का महाकाल धाम हो या केदारनाथ या बद्रीनाथ हो, हर जगह ऐसा ही हो रहा है।
एक समय भारत से बहुत सी मूर्तियां चोरी कर विदेश ले जाई गईं। इन्हें बेच दिया गया। कोई इन्हें पूछने वाला नहीं था। हम पिछले 12 साल में ऐसी 600 मूर्तियां वापस लाए हैं। देश अब उस राह पर आगे बढ़ रहा है, जिसका सपना हमारे ऋषियों और राष्ट्रभक्तों ने देखा था। उनका विचार शक्ति हमारी ताकत है।
मोदी बोले- नई शिक्षा नीति में संस्कृति के साथ टेक्नोलॉजी सिखा रहे
2015 में मुझे स्वामी जी की स्मृति में एक सिक्का जारी करने का मौका मिला था। मैंने कहा था कि स्वामी जी का जीवन एक प्रतीक है। उनके गुरु ने उन्हें आशीर्वाद दिया था- ‘गो, रोर लाइक अ लॉयन’ यानी जाओ, शेर की तरह दहाड़ो।
मोदी बोले- वेदों में लिखा है राष्ट्र को महान बनाएं
अब चिन्मय मिशन का अमृत महोत्सव भी भारत के अमृत काल से जुड़ रहा है। ये भारत के संकल्प की असली ताकत है। हमारे वेदों में लिखा है- राष्ट्र का हित चाहने वाले हम लोग राष्ट्र को महान बनाएं।
स्वामी जी ने गीता ज्ञान के अभियान की शुरुआत की। आज इसी का परिणाम है कि लाखों युवा भारत के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर का काम कर रहे हैं।

By Vishal

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