सारनी। मोदी सरकार 2.0 ने देश के अन्नदाता की आर्थिक समृद्धि के अपने वादे के अनुरूप बहुप्रतीक्षित कृषि विधेयक 2020 लोकसभा और राज्यसभा में पास करवा कर एक और मील के पत्थर को छू लिया है। यह विधेयक जहां एक ओर देश के किसानों को उनकी उपज को बिक्री करने के लिए एक से अधिक विकल्प उपलब्ध करवाता है, अधिक से अधिक लाभ सुनिश्चित करता है वहीं दूसरी ओर बाजार और किसानों के बीच अब तक काम करने वाले बिचौलियों को पूरी तरह से समाप्त करने का कार्य करता है।
आज तक चुनाव आने पर कुछ राजनीतिक पार्टियां किसानों से कर्जमाफी सहित तमाम झूठे- सच्चे वादे उनका वोट हथियाती रही हैं,सत्ता में आती रही हैं और सत्ता में आने के बाद सब कुछ भूल जाती हैं, किसान ठगा का ठगा रह जाता है, तभी तो आजादी के इतने सालों बाद भी भारत में किसानों की स्थिति सुधरने के बजाए और बिगड़ती चली गई। अब इन विधेयकों के पास हो जाने के बाद किसान अपनी मेहनत का प्रतिफल बेहतर तरीके से प्राप्त कर सकेगा और अपनी उपज को उचित स्थान पर विक्रय कर अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करेगा तथा किसी के झांसे या बहकावे में नहीं आएगा।
कृषि विधेयक 2020 के पास होने के बाद इन राजनीतिक पार्टियों और बिचौलियों को अपना बुना हुआ जाल सिमटता हुआ नजर आ रहा है तभी तो वह इन विधायकों के बारे में भोले-भाले किसानों को विभिन्न तरीकों से भ्रमित करने में लगे हुए हैं और नकली विरोध प्रदर्शनों के द्वारा अपनी कुंठा को किसानों का आक्रोश साबित करने पर तुले हुए हैं। इन झूठे लोगों के द्वारा किसानों से कहा जा रहा है कि विधेयकों के पास होने के बाद सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि मंडियों को समाप्त कर दिया जाएगा और चुनिंदा बड़े व्यापारियों द्वारा किसानों से उनकी उपज को आने-पौने दामों में खरीदा जाएगा। जबकि सच्चाई यह है कि सरकार द्वारा मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीददारी पूर्ववत जारी रहेगी और यदि किसान चाहे तो वह अपनी उपज को मंडी के बाहर अधिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से पंजीकृत व्यापारियों को बेच सकता है।
इन विधायकों के पास होने के बाद आम किसानों में सरकार के प्रति हर्ष का भाव है और किसानों का कहना है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में भाजपा की सरकारें ही किसानों की सच्ची हितैषी रही है और मोदी सरकार द्वारा किसानों को किसान सम्मान निधि सहित अन्य लाभ और अब यह विधेयक इसके शानदार उदाहरण हैं। कृषि विधेयक 2020 का यदि संक्षिप्त निचोड़ निकाला जाए तो कहा जा सकता है कि अब किसान मस्त हैं और बिचौलिए पूरी तरह पस्त हो चुके हैं।
कृषि विधेयक 2020: किसान मस्त बिचौलिए पस्त – रंजीत सिहं
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