मुंहबोले भाई ने करवाई बहनोई की हत्या, यूपी और खरगोन से बुलाएं सुपारी किलर

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  • शातिर हत्यारों ने तीन मिनट में बदले कपड़े, छुपाया कट्टा,मास्टर माइंड सहित एक हिरासत में, एक फरार
  • मुंहबोले भाई ने करवाई बहनोई की हत्या, यूपी और खरगोन से बुलाएं सुपारी किलर
  • तीन दिन से रैकी कर रहे थे हत्यारे, मौका पाते ही दिया वारदात को अंजाम
  • अपने ही रिश्तेदार को हत्या के लिए चुना, 15 लाख की सुपारी और प्रापर्टी में हिस्सेदारी का भी लालच
  • शातिर हत्यारों ने तीन मिनट में बदले कपड़े, छुपाया कट्टा,मास्टर माइंड सहित एक हिरासत में, एक फरार

बैतूल। जिला मुख्यालय के व्यस्ततम व्यवसायिक क्षेत्र में 18 मार्च को हार्डवेयर व्यवसायी की हत्या के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने 24 घंटे के अंदर वारदात के मास्टर माइंड एवं सहित दो आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। व्यवसायी अशोक पंवार को गोली मारने वाला आरोपी अभी भी फरार है। हालांकि यह बैतूल पुलिस के लिए बड़ी सफलता है, साथ ही जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया उस हिसाब से इस हत्याकांड का इतने कम समय में खुलासा करना पुलिस के लिए चुनौती भी थी। पूरे मामले में कई पहलू सामने आए है जो चौकाने वाले भी है। हत्याकांड के तार 15 साल पुरानी एक गुमशुदगी से भी जुड़े है। एसपी निश्छल एन झारिया ने एएसपी कमला जोशी, एसडीओपी शालिनी परस्ते, मयंक तिवारी, टीआई अरविंद कुमरे, रविकांत डेहरिया, प्रभारी सीन ऑफ क्राईम आबिद अंसारी, निरीक्षक जयपाल इवनाती, मुकेश ठाकुर की मौजूदगी में हत्याकांड का खुलासा मीडिया के सामने किया।

मृतक की पत्नी के मुंहबोले भाई ने दिया हत्याकांड को अंजाम

एसपी निश्छल झारिया ने बताया कि व्यवसायी अशोक पवार की हत्या के पीछे मास्टर माइंड उनकी पत्नी बबीता का मुंहबोला भाई विलेशगिरी गोस्वामी पिता सेनगिरी महाराज निवासी पुरानी बिंदवारी बांदा उत्तर प्रदेश है। बबीता का मायका आमला का है और वह दो भाई और दो बहने है। बबीता का एक भाई 15 साल पहले गुम हो गया था, जिसकी गुमशुदगी भी दर्ज कराई गई। विलेश उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और हाथी के साथ जगह-जगह घूमकर भिक्षावृत्ति से अपनी आजीविका चलाता है। जब विलेश अपने हाथी के साथ आमला पहुंचा तो बबीता के मायके वालों को उसमे अपने गुम बेटे की झलक लगी, जिसके बाद परिवार विलेश से जुड़ गया। विलेश का अक्सर परिवार में आना जाना बना रहता और बबीता एवं उसकी बेटी से भी उसकी फोन पर अक्सर चर्चा होती थी। विलेश गोस्वामी से संबंधों को लेकर बबीता के पति अशोक को एतराज भी था और वह अक्सर बबीता एवं परिवार के लोगों को उससे बात करने और संबंध रखने से मना भी करता था। इधर विलेश और बबीता के बीच जो संवाद होते थे उससे विलेश को लगता था कि बबीता अपने ससुराल में परेशान है। इधर विलेश को बबीता के मायके पक्ष द्वारा सम्पत्ति में हिस्सेदारी देने की भी बात कही गई थी। विलेश को लेकर बबीता के दूसरे भाई जगदीश, पति एवं अन्य लोगों में भी वैचारिक मतभेद करीब डेढ़ वर्ष थे।

डेढ़ वर्ष पहले से बना लिया था मौत के घाट उतारने का मन

विलेश को जबसे पता चला था कि बबीता अपने ससुराल में परेशान है तभी से उसने बहनोई अशोक पंवार को मारने का मन बना लिया था। अंतत: विलेश ने बांदा निवासी अपनी बुआ के बेटे राजेश गिरी पिता परसुराम गोस्वामी को हत्या करने के लिए मनाया। इसके लिए 15 लाख रुपए एवं बबीता के मायके से मिलने वाली सम्पत्ति में हिस्सेदारी का भी लालच दिया विलेश ने राजेश को दिया। राजेश ने खरगोन निवासी एक और मित्र को भी इस साजिश में शामिल किया। एसपी ने बताया कि विलेश पिछले चार महीने से सुल्तानपुर के माता मंदिर में निवास कर रहा था। हत्या के दो दिन पहले बैतूल आकर उसने अपने बुआ के बेटे एवं उसके दोस्त को पूरा फीडबैक दिया और वापस लौट गया। प्लानिंग के अनुसार घटना दिनांक से तीन दिन पहले 15 मार्च को आरोपी गंज क्षेत्र की दो अलग-अलग होटलों में रुके। 18 मार्च को रात जैसे ही मौका मिला 9.25 मिनट पर हार्डवेयर व्यवसायी अशोक पंवार पर फरार आरोपी ने गोली दाग दी। एसपी ने बताया कि इस मामले में होटल मालिकों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों से होटल में पहचान संबंधित दस्तावेज एवं एंट्री में लापरवाही की गई है।

सवा घंटे तक क्षेत्र में करते रहे रैकी

घटना दिनांक को राजेश गिरी गोस्वामी और खरगोन निवासी उसका मित्र दुकान के आसपास रैकी कर रहे थे। करीब सवा घंटे तक रैकी के बाद मौका मिलते ही फरार आरोपी ने दुकान में घुसकर अशोक के सीने में गोली मार दी वहीं राजेश गिरी गोस्वामी दुकान के बाहर खड़ा टहलते रहा। हत्या को अंजाम दिने के बाद कुछ ही मिनटों में दोनों आरोपी फरार हो गए। दोनो ही आरोपी इतने शातिर थे कि महज तीन से चार मिनट में उन्होंने अपने कपड़े बदल लिए और बंदूक भी ठिकाने लगा दी। इधर हत्या को लेकर आरोपियों ने विलेश गिरी को जानकारी दी तो वह भी बैतूल पहुंचा। पुलिस ने पूरे मामले में घेराबंदी, नाकाबंदी कर पूरी रात चेकिंग की। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर विलेश एवं राजेश की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया। सीसीटीवी फुटेज में दो आरोपी नजर आ रहे है जिसमें एक नीली शर्ट पहने है जो राजेश गोस्वामी है वहीं दूसरा आरोपी खरगोन निवासी सुपारी किलर है जिसने ही गोली चलाई। दोनों ही आरोपियों के पास कट्टे होने की जानकारी सामने आई है। पूरे मामले में पुलिस ने एक देशी कट्टा एवं घटना में प्रयुक्त वाहन जब्त किया है। थाना गंज में अपराध क्रमांक 118/25, धारा 103(1), 3(5) दर्ज किया गया।

डिलीट मैसेज से मिली लीड

एसपी श्री झारिया ने बताया कि मृतक अशोक पंवार के मोबाईल से देर रात मैसेज किए गए थे और उन्हें डिलीट कर दिया गया था। मैसेज को रिकवर किया गया जिससे पुलिस को सुराग मिले और इसी के आधार पर पड़ताल शुरु की गई। हत्या के मास्टर माइंड विलेश ने भी अशोक की हार्डवेयर दुकान का फोटो दूसरे आरोपी को भेजने के बाद डिलीट कर दिया था, जिसे रिकवर किया गया और पुलिस हत्यारों का पता लगाने में सफल रही।

हत्या की गुत्थी सुलझाने में इनकी रही सराहनीय भूमिका

आरोपियों की गिरफ्तारी में एसडीओपी सुश्री शालिनी परस्ते, एसडीओपी शाहपुर मंयक तिवारी, थाना प्रभारी एवं निरीक्षक अरविंद कुमरे (थाना प्रभारी) निरीक्षक रविकांत डहेरिया, निरीक्षक आबिद अंसारी (प्रभारी, सीन ऑफ क्राइम), निरीक्षक जयपाल इनवाती, निरीक्षक मुकेश ठाकुर, उपनिरीक्षक इरफान कुरैशी, उपनिरीक्षक नितिन पटेल, उपनिरीक्षक राकेश सरयाम, उपनिरीक्षक रवि शाक्य, उपनिरीक्षक गजेन्द्र केन, सहायक उपनिरीक्षक उमेश बिल्लोरे, सहायक उपनिरीक्षक किशोरीलाल सल्लाम, प्रधान आरक्षक, प्रधान आरक्षक हितुलाल, प्रधान आरक्षक चन्द्रकिशोर, प्रधान आरक्षक मयुर, प्रधान आरक्षक सुभाष माकोड़े एवं अनिरुद्ध यादव नितिन, नवीन, शिव, सुरजीत जाट, मोहित भाटी, मनोज कोलारे, नरेन्द्र, धीरज काले एवं आरक्षकनीरज पांडे, सायबर सेल के अश्विनी चौधरी, आरक्षकों में राजेंद्र, बलराम, दीपेंद्र एवं पंकज, विजय, हेमंत, आकांक्षा तिवारी की सराहनीय भूमिका रही।

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