- स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास सहित विभिन्न विभागों के प्रस्तावों पर हुई चर्चा
- आजीविका, आंगनबाड़ी केंद्र और पेयजल आपूर्ति के कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश
बैतूल। कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला खनिज प्रतिष्ठान डीएमएफ की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में डीएमएफ के अंतर्गत संचालित एवं प्रस्तावित विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान जिले में एनक्वास फैसिलिटी विकसित किए जाने के संबंध में चर्चा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्वीकृत मरम्मत कार्यों का सत्यापन कराने के निर्देश जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) को दिए। वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग के निर्माण कार्यों के प्रस्ताव जिला पंचायत सीईओ के साथ समन्वय कर शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए।
स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के संचालन के लिए उपलब्ध भवनों की जानकारी ली। उन्होंने ग्राम लादी में दोना-पत्तल निर्माण गतिविधि को प्रोत्साहित करने के लिए जिला पंचायत सीईओ को प्रस्ताव तैयार करने तथा वन विभाग के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने जिले के ऐसे सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए, जहां मरम्मत की आवश्यकता है। उन्होंने इन भवनों का आकलन कर आवश्यक मरम्मत कार्यों को वीबी-जी रामजी योजना से जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही स्पष्ट किया कि भवन उपलब्ध होने के बावजूद यदि आंगनबाड़ी केंद्र निजी भवनों में संचालित पाए जाते हैं, तो संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के वेतन से राशि की वसूली की जाएगी।
कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ को जिले की पंचायतों में उपलब्ध राशि की जानकारी संकलित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा सीसी रोड, स्टॉप डेम सहित अन्य निर्माण कार्यों के प्रस्तावों का सत्यापन कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने पेयजल आपूर्ति, पशुपालन एवं पर्यटन के क्षेत्र में भी बड़े और महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वीकृत विकास कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कराए जाएं। सभी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।